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The tenth Guru Gobind Singh celebrating the 347 th Sriguru Lights

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अमृतसर। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर गुरुद्वारा गुरु नानक सिंह सभा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में शुरू किए गए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। गुरु चरणों में सुख शांति व सरबत की भलाई के लिए के लिए अरदास की गई। रागी जत्थे ने कीर्तन से संगत को गुरबाणी से जोड़ा। मौके पर हलका दक्षिण के पूर्व विधायक व पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव हरजिंदर सिंह ठेकेदार उपस्थित हुए व गुरुद्वारा कमेटी की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। 

मौके पर ठेकेदार हरजिंदर सिंह ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी न सिर्फ आध्यात्मिक गुरु बल्कि बेमिसाल कवि व समर्पित भगत भी थे। वह महान योद्धा भी थे, जिन्होंने गरीबों की रक्षा के लिए अपना परिवार कुर्बान कर दिया। उनकी धर्म के प्रति बेमिसाल कुर्बानियां कभी भुलाई नहीं जा सकती है। सभी को उनके बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए। 

वहीं दूसरी ओर खालसा कॉलेज गवर्निग कौंसिल द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश दिवस पर खालसा कालेज में स्थित गुरुद्वारा साहिब में उत्साह व श्रद्धा से मनाया गया। इस दौरान श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग के बाद खालसा कालेज के विद्यार्थियों ने शबद कीर्तन करके संगत को निहाल किया। सिख इतिहास व खोज विभाग के मुखी इंद्रजीत सिंह गोगोयानी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन संबंधी जानकारी दी। इस दौरान कौंसिल के संयुक्त सचिव सुखदेव सिंह अब्दाल ने कीर्तन गायन करने वाले विद्यार्थियों को सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया। इसके बाद लंगर बांटा गया। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर मंगलवार को आनंद फैशन हाउस (रेमंड) की ओर से जीटी रोड पर लंगर वितरित किया गया। इस अवसर पर आनंद फैशन हाउस के मालिक राजीव सोढी ने शहरवासियों को गुरु पर्व की बधाई दी। 

वहीं गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश उत्सव के पावन अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा बाजार बाबा बोहड़ी वाला में श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया। रागी जत्थों ने कीर्तन किया। मौके पर जरूरतमंदों को कंबल, शाल व जुराबें भेंट की गईं। गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश दिवस पर वार्ड-42 से पार्षद व महासचिव अकाली जत्था शहरी मनमोहन सिंह टीटू ने मंडी फतेह सिंह में लंगर लगाया। जत्थेदार पूर्ण सिंह मत्तेवाल ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर समूह सिख संगत को उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रण लेना चाहिए। 


वहीं दूसरी ओर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में तरनतारन रोड पर स्थित इलाका कोट मित्त सिंह से नगर कीर्तन निकाला गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया और पांच प्यारों की अगुवाई में निकला नगर कीर्तन कोट मित्त सिंह से गुरु अजरुन देव नगर, दशमेश नगर, गुरु नानक कालोनी, ईश्वर नगर, गुरवेल नगर, सर्बजीत सिंह नगर और अन्य इलाकों से होते हुए शाम को वापस कोट मित्त सिंह पहुंचकर संपन्न हुआ। 

वाराणसी- धर्मसंरक्षक, महादानी व सिख धर्म के दसवें गुरु श्रीगुरु गोविंद सिंहजी महाराज का 347वां प्रकाशोत्सव मंगलवार को शहर के गुरुद्वारों में मनाया गया। उन्हें याद किया गया, उनसे आशीष लिया गया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरुबाग एवं गुरुद्वारा बड़ी संगत नीचीबाग में बड़े उल्लास के साथ गुरु महाराज का प्रकाशोत्सव मनाया गया। अल सुबह पौने चार बजे गुरु का नाम सुमिरन हुआ। इसी कड़ी में सुहाना स्वागत भी किया गया। 1इसके बाद दिनभर सबद कीर्तन चला जिसमें सैकड़ों गुरुभक्तों ने आनंद के साथ गुरु गोविंदजी को भजा। भक्तों ने बड़े जोश के साथ गुरुद्वारों में वाहे गुरु, वाहे गुरु एवं बोलो सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारे लगाए। 

गुरुग्रंथ साहिब की फूलों से सजी पालकी की तमाम भक्तों ने परिक्रमा कर पुण्य बटोरा। मत्था टेक कर अपने जीवन को धन्य बनाया। अखंड पाठ का समापन हुआ। मुख्यग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने दीवान समाप्ति अरदास किए व प्रसाद वितरण हुआ। दोपहर से अटूट लंगर चला। इस अवसर पर गुरुनानक खालसा बालिका इंटर कालेज एवं गुरुनानक इंग्लिश स्कूल के बच्चों ने भी शबद कीर्तन गाया। भाई जगतार सिंह अमृतसरवाले व भाई रणधीर सिंह की संगत ने सबको निहाल कर दिया।

गुरुग्रंथ साहिब की फूलों से सजी पालकी की तमाम भक्तों ने परिक्रमा कर पुण्य बटोरा। मत्था टेक कर अपने जीवन को धन्य बनाया। अखंड पाठ का समापन हुआ। दोपहर से अटूट लंगर चला। इस अवसर पर गुरुनानक खालसा बालिका इंटर कालेज एवं गुरुनानक इंग्लिश स्कूल के बच्चों ने भी शबद कीर्तन गाया। भाई जगतार सिंह अमृतसरवाले व भाई रणधीर सिंह की संगत ने सबको निहाल कर दिया।

'जऊ तऊ प्रेम खेलण का चाओ सिर धरि गलि मेरी आओ'-
'जऊ तऊ प्रेम खेलण का चाओ, सिर धरि गलि मेरी आओ''देह शिवा वर मोहि एहे शुभ करमण ते कबहुं न टरों,न डरों अरि सो जब जाइ लरों, निशचै कर अपनी जीत करो' 

दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की यह बाणी हर इन्सान को उनके चरणों से जोड़ने का जज्बा भरती है। उनके प्रकाश पर्व पर महानगर के गुरुद्वारों में श्रद्धा से मनाया गया। दशम पिता सरबंस दानी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व पर मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल श्री हरिमंदिर साहिब में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हाड़ कंपाती सर्दी में संगत ने पवित्र सरोवर में डुबकी लगाई। श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य भवन में पवित्र जलौ सजाए हुए थे। जलौ को देखने के लिए देश-विदेश की संगत श्री हरिमंदिर साहिब पहुंची। मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे संगत नतमस्तक हुई। भारी भीड़ उमड़ने के कारण संगत को दर्शनों के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। संगत ने इस पावन अवसर पर गुरु साहिबान के आगे अरदास की। श्री हरिमंदिर साहिब की पहली मंजिल में बैठकर संगत ने श्री जपुजी साहिब व श्री सुखमणी साहिब के पाठ किए। श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य भवन को फूलों से सजाया हुआ था। रात को आतिशबाजी का नजारा भी देखने वाला था। संगत ने परिक्रमा में दीप माला कर मन्नत मांगी। श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित सभी सराय संगत से भरी पड़ी थीं। इस अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब के हुजूरी रागी जत्थों ने कीर्तन कर संगत को गुरु घर के साथ जोड़ा। 

तख्त श्री पटना साहिब में टकराव-

पटना- श्री गुरु गोबिंद सिंह की 347वीं जयंती पर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में दस्तारबंदी के दौरान मंगलवार को दो गुटों में तलवारें खिंच गईं। विश्व में सिखों के दूसरे तख्त पटना साहिब में वर्ष 2017 में आयोजित होने वाले 350वें प्रकाशोत्सव की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी प्रताप सिंह की दस्तारबंदी रस्म निभाई जा रही थी। जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह द्वारा इसका विरोध करने पर विवाद शुरू हो गया, जिसमें तलबारबाजी व लाठी चलने से जत्थेदार व उनके पुत्र समेत चार लोग घायल हो गए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरू गोविंद सिंह की जयंती पर राज्यवासियों विशेषकर सिख-भाई बहनों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गुरू गोविंद सिंह का जीवन त्याग, बलिदान और मानव सेवा को समर्पित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरू गोविंद सिंह के संदेशों को अपनाकर समाज में प्रेम, आदर व सद्भाव के रिश्तों को मजबूत करें। 

सिख पंथ के दसवें गुरु केवल सिख धर्म के धर्म गुरु नहीं बल्कि विश्व के महान लोकनायक और युग प्रवर्तक महापुरुष थे। उन्होंने भटके लोगों को सही मार्ग दिखलाने के लिये धर्म, जाति, देश व भाषा का भेद मिटाकर भावनात्मक एकता स्थापित करने के उद्देश्य से 'मानस जात' की स्थापना की। उक्त बातें तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के भव्य पंडाल में सजे विशेष दीवान में दशमेश गुरु के 347 वें प्रकाशोत्सव पर विद्वानों ने मंगलवार को देश-विदेश से आये संगतों के बीच कहीं। जयंती समारोह में विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता नंद किशोर यादव, हिंदी साहित्य सम्मलेन के अध्यक्ष अनिल सुलभ व अन्य को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। हंगामा के कारण कार्यक्त्रम में व्यवधान पड़ा। शाम के कार्यक्त्रम में जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह की देखरेख में कथा प्रवचन हुए। उधर सुबह में पौषसुदी सप्तमी को ले गुरु का बाग में श्रद्धालुओं ने सरोवर में डुबकी लगा मनोवांछित फल मांगा।

कीर्तन-प्रवचन से निहाल संगत- पंडाल में सजे विशेष दरबार की कार्रवाई अहले सुबह हजूरी रागी जत्था भाई इंद्रजीत सिंह के कीर्तन से हुयी। अरदास, हुकुमनामा व कड़ाह प्रसाद के बाद जगाधरी के भाई सत्येंद्र पाल सिंह रागी जत्था ने शब्द-कीर्तन प्रस्तुत किया। लुधियाना के शिरोमणि कथावाचक ज्ञानी पिंदरपाल सिंह ने प्रवचन में गुरु गोविन्द सिंह महाराज के जीवनी पर प्रकाश डाला। भजन-कीर्तन-प्रवचन से गूंजा दरबार- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ हुये शब्द कीर्तन में अमृतसर के भाई गुर इकबाल सिंह ने शब्द कीर्तन किया। हजूरी रागी जत्था के भाई देविंदर सिंह ने 'हर जिओ निमानियां तू मान.' हजूरी रागी जत्था पटना साहिब के भाई इंदरजीत सिंह ने 'आन के वधेया दूध पुत के देवेया.' श्रीनगर के भाई हरजिंदर सिंह ने 'वाहो-वाहो गोविंद सिंह आपे गुरु चेला.,' पटना साहिब हजूरी रागी जत्था के भाई जोगिंदर सिंह ने 'तही प्रकाश हमारा भयो, पटना शहर विखे भव लयो.' से संगत निहाल हुई। संगतों के 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारों से पंडाल गूंजता रहा।

संतों ने डाला जीवनी पर प्रकाश- कथावाचकों में गौहर-ए-मस्कीन सिख प्रचारक ज्ञानी रंजीत सिंह ने दशमेश गुरु की जीवनी पर प्रकाश डालते कहा कि गुरु गोविंद सिंह सिख धर्म के गुरु नहीं बल्कि खालसा पंथ के संस्थापक शस्त्र के महारथी और शास्त्र के भी धनी थे। वक्ताओं ने शहीदों के पिता व शहीदों का बेटा गुरु गोविंद सिंह को बार-बार शत-शत नमन किया। मुख्य ग्रंथी भाई राजेन्द्र सिंह ने अरदास किया। 'बोले सो निहाल, संत श्री अकाल' के नारे से पंडाल गूंजता रहा। 

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